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हिंदी August 16, 2026

सोनवर्षा के बड़ी भगवती मंदिर में नागपंचमी की गूंज: सांप के काटे को जीवनदान मिलने की अद्भुत मान्यता

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Times of Bhutan
Staff Editorial Desk

बिहपुर (भागलपुर): नागपंचमी के पावन अवसर पर बिहपुर प्रखंड के सोनवर्षा गांव स्थित प्राचीन और सिद्ध 'श्री श्री 1008 बड़ी भगवती स्थान' में भक्तों की भारी भीड़ जुटने लगी है। नागपंचमी के विशेष आयोजन को लेकर मंदिर कमेटी और समस्त ग्रामीणों ने पूरी तैयारी कर ली है, और मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन शुरू हो गया है।

सांप के काटे का 'अचूक' इलाज

​इस मंदिर की सबसे अद्भुत और अटूट मान्यता यह है कि यहाँ सांप के काटे हुए व्यक्ति को जीवनदान मिलता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, माता रानी पर सच्ची श्रद्धा रखने वाले लोगों पर किसी भी विषैले सांप का जहर असर नहीं करता है। जब भी सांप काटने का कोई मामला सामने आता है, व्यक्ति को मंदिर लाया जाता है और उसे पवित्र 'नीर' पिलाया जाता है, जिससे वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। यह 'लगभग 10 जिलों का एकमात्र मंदिर है जहां सर्पदंश से व्यक्ति स्वस्थ होकर जाते हैं'। इसी आस्था के कारण, न केवल स्थानीय लोग, बल्कि भागलपुर, खगड़िया और अन्य कई जिलों से लोग माता के दर्शन करने और अपनी मन्नतें मांगने आते हैं।

सौ साल पुराना इतिहास

​मंदिर का इतिहास काफी रोचक है। ग्रामीणों के अनुसार, गंगा नदी के कटाव के कारण पुराना गांव नष्ट हो गया, जिसके बाद लोग सोनवर्षा आकर बस गए। शुरू में ग्रामीणों ने भगवती मैय्या की पूजा के लिए एक झोपड़ी का मंदिर बनाया। बाद में, ग्रामीणों के सहयोग और दान से एक पक्का और भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। आज यह मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है।

तीन दिवसीय भव्य आयोजन: कार्यक्रम का विवरण

​मंदिर कमेटी 'नागपंचमी पूजा समिति, ग्राम सोनवर्षा' द्वारा जारी पोस्टर के अनुसार, इस वर्ष भी तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है:

  • 15/08/2026 (सुबह): सुबह 5 बजे से नामधुन प्रारंभ होगा, जिसमें माता के नाम का जप किया जाएगा।
  • 16/08/2026 (शाम): शाम 4 बजे से पाठा बलि और मुंडन संस्कार के लिए निमंत्रण प्रारंभ होगा।
  • 17/08/2026 (नागपंचमी का मुख्य दिन):
  • सुबह 5 बजे से: फुलाईस (फूलों और श्रृंगार का विशेष आयोजन)।
  • दोपहर 1 बजे से: माता रानी को प्रसाद, कलश और आभूषण चढ़ाया जाएगा।
  • शाम 5 बजे से: फुलाईस का एक और सत्र।
  • रात्रि 8 बजे से: पाठा बलि।
  • रात्रि 10 बजे के बाद: मुंडन संस्कार और विसर्जन।

एक विशेष परंपरा: गाँव की सभी बेटियाँ भी इस पावन पर्व पर अपने परिवार के साथ माता भगवती का आशीर्वाद लेने के लिए विशेष रूप से आती हैं, जो इस त्यौहार की एक और सुंदर विशेषता है।

​नागपंचमी का यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र के लोगों के लिए एक प्रमुख सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी है, जो सभी को एक सूत्र में पिरोता है।



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